क्या मोतियाबिंद का कारण बनती है मोबाइल की स्क्रीन से निकलने वाली नीली रोशनी? डॉक्टर से जानें इसके बारे में!
आज के समय में छोटे बच्चों से लेकर बड़े बुजुर्ग तक सभी लोगों में आंखों से जुड़ी कई तरह की समस्यााओं को देखा जा सकता है। क्योंकि, आज सभी लोग अपना कोई भी काम बिना मोबाइल फोन के नहीं कर सकते हैं, उन को हर छोटे से छोटे काम के लिए फोन या फिर लैपटॉप चाहिए होता है। कई बच्चे बिना काम के भी फ़ोन चलाते रहते हैं और स्क्रीन पर काफी टाइम बिता लेते हैं। इसके अलावा, सोशल मीडिया पर टाइमपास करने, पढ़ाई करने या फिर कोई भी काम करने के लिए लोग कई घंटों स्क्रीन पर समय गुजार देते हैं। दरअसल, मोबाइल फोन या फिर लैपटॉप से निकलने वाली ब्लू लाइट आंखों में कई समस्याओं को पैदा कर देती है। जिसमें से कई लोगों का मानना है, इसकी वजह से मोतियाबिंद की समस्या भी हो सकती है। यह माना, कि मोबाइल फोन से निकलने वाली ब्लू लाइट आंखों से जुड़ी कई समस्याओं को पैदा कर सकती है, पर इसकी वजह से सीधे तौर पर मोतियाबिंद की समस्या नहीं हो सकती। आइये इस लेख के माध्यम से इसके बारे में इस के डॉक्टर से और विस्तार से जानकारी प्राप्त करते हैं।
क्या मोबाइल की स्क्रीन से निकलने वाली नीली रोशनी मोतियाबिंद का कारण बनती है?
दरअसल, इस पर डॉक्टर का कहना है, कि मोबाइल फोन या फिर लैपटॉप से निकलने वाली ब्लू लाइट आंखों की सेहत को तो जरूर प्रभावित करती है, पर यह आंखों के रेटिना का पूरी तरीके से नुकसान नहीं करती है और न ही यह एक सीधे तौर पर, एक व्यक्ति में मोतियाबिंद का कारण बनती है। हालांकि, एक व्यक्ति को जरूरत से ज्यादा स्क्रीन को देखने पर आंखों से जुड़ी कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है, जिसमें आंखों में दिक्क्त होना, सिरदर्द और अस्थायी धुंधलेपन शामिल हो सकता है। डॉक्टर के अनुसार, काफी लंबे वक्त तक और लगातार किसी भी डिजिटल स्क्रीन को देखना, काफी पास से फोन का इस्तेमाल करना, और काम के दौरान सही तरीके से ब्रेक न लेने पर आंखों पर काफी ज्यादा दबाव पड़ सकता है, जिससे आंखों से जुड़ी कोई भी गंभीर समस्या हो सकती है। हालांकि, अभी तक ऐसा कोई ठोस प्रमाण नहीं पाया है, जिससे कि यह साबित हो सके कि मोबाइल फोन की रोशनी से मोतियाबिंद की समस्या हो सकती है।
मोतियाबिंद के प्रमुख लक्षण क्या हो सकते हैं?
डॉक्टर के अनुसार, जो व्यक्ति मोतियाबिंद की समस्या से पीड़ित होता है, उसको अपने कई तरह के लक्षण नज़र आ सकते हैं, जिसमें से कुछ निमन्लिहक्त अनुसार हो सकते हैं, जैसे कि
- आंखों की रोशनी धीरे-धीरे धुंधली हो जाना।
- आंखों के आगे धुंधलापन छा जाना।
- कुछ भी देखने पर हर चीज दो-दो नजर आना।
- पीड़ित व्यक्ति के चश्में में तेजी से बदलाव आना।
- रोशनी को लेकर काफी ज्यादा सेंसिटिविटी महसूस करना।
- रात के समय गाड़ी चलाते वक्त परेशानी होना।
- रात को आंखों से काफी कम दिखाई देना।
- आसपास की चीजें ज्यादातर पीली या फिर फीकी सी दिखाई देना।
- किसी भी लाइट के आस पास घेरा नज़र आना।
आपकी आंखों को स्क्रीन से कैसे कैसे सुरक्षित रख सकते हैं?
दरअसल, इस पर डॉक्टर का कहना है, कि ज्यादा स्क्रीन टाइम की वजह से आपको आंखों से जुड़ी कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। वैसे तो, ज्यादातर लोगों में आंखों से जुड़ी समस्याओं का होना काफी आम है, पर जब हम जरूरत से ज्यादा मोबाइल, लैपटॉप और टीवी की स्क्रीन पर काफी ज्यादा फोकस करने लग जाते हैं, तो इसकी वजह से आंखों की पलक झपकने की दर काफी ज्यादा कम हो जाती है। इसके अलावा, आंखों की नमी को बना कर रखने वाली आंसू की परत अस्थिर हो जाती है, जिसकी वजह से आपकी आंखों को कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है, जिसमें ड्राईनेस, जलन और चुभन जैसी समस्याएं शामिल हो सकती हैं। दरअसल, अगर आप आंखों से जुड़ी इस तरह की समस्याओं से अपना बचाव करना चाहते हैं, तो इसके लिए आप निम्नलिखित कुछ टिप्स को अपना सकते हैं, जैसे कि
- नियमित आपकी आंखों की जांच कराना।
- अपनी आंखों को अच्छे तरीके से साफ़ रखना।
- इस दौरान, फोन को काफी पास से देखने से बचें।
- स्क्रीन पर ज्यादा समय लगने पर जान के अपनी पलकों को ज्यादा झपकाएं।
- समस्या होने पर डॉक्टर की सलाह पर लुब्रिकेटिंग आई ड्रॉप्स का उपयोग करना।
- 20-20-20 नियम का पालन करें।
निष्कर्ष: आँख शरीर का एक बहुत ही नाजुक हिस्सा है, जो किसी भी चीज से तुरंत प्रभावित हो जाती है। इनमें होने वाली कोई भी समस्या सीधे आंखों की नज़र को प्रभावित करती है, जिसकी वजह से एक व्यक्ति को देखने में समस्या महसूस हजो सकती है। इसलिए, आंखों की देखभाल करना बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। मोबाइल फोन से निकलने वाली नीली रोशनी आंखों की सेहत पर जरूर बुरा असर डालती है, पर इसकी वजह से एक व्यक्ति को मोतियाबिंद की समस्या होती है, इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। दरअसल, मोतियाबिंद जैसी समस्या उम्र से जुड़ी एक प्राकृतिक प्रक्रिया है, जो काफी धीरे-धीरे एक व्यक्ति को प्रभावित करती है। हालांकि, मोबाइल फोन से निकलने वाली नीली रोशनी सीधे तौर पर मोतियाबिंद का कारण नहीं बनती, पर स्क्रीन पर ज्यादा वक्त बिताने पर आंखों में ड्राई आई सिंड्रोम, सिरदर्द, आंखों में थकान और धुंधलापन जैसी समस्या हो सकती है। इस तरह की समस्याओं से बचने के लिए आप एक दम सही तरीके से और सीमित मात्रा में डिजिटल उपकरणों का इस्तेमाल कर सकते हैं। अगर फिर भी आपको अपनी आँखों में इस तरह की समस्या कोई भी गंभीर समस्या महसूस होती है, तो आपको तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। इसके बारे में ज्यादा जानकारी प्राप्त करने के लिए और आंखों से जुड़ी किसी भी तरह की समस्या का समाधान पाने के लिए आप आज ही सवेरा हॉस्पिटल में जाकर अपनी अपॉइंटमेंट को बुक करवा सकते हैं और इसके विशेषज्ञों से इसके बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
