काला और सफेद मोतियाबिंद में क्या फर्क है?

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आखिर काले और सफेद मोतियाबिंद में क्या अंतर हो सकता है? डॉक्टर से जानें, क्या दोनों बीमारियों में व्यक्ति हो जाता है अँधा!

यह सभी जानते हैं, कि आंखों के बिना यह जिंदगी जिंदगी नहीं है, पर फिर भी लोग इन का अच्छे से ध्यान नहीं रख पाते हैं और आंखों से जुड़ी कई तरह की समस्याओं का शिकार हो जाते हैं। इन समस्याओं में आंखों में काला मोतिया और सफेद मोतिया होना भी शामिल है। यह दोनों ही समस्याएं आंखों के लिए काफी ज्यादा गंभीर मानी जाती हैं। ध्यान न देने पर यह समस्याएं अपना एक गंभीर रूप भी धारण कर सकती हैं। इस तरह की स्थिति में ज्यादातर लोग काला मोतिया और सफेद मोतिया को एक ही समझ लेते हैं और ज्यादा ध्यान नहीं देते हैं, पर आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें, कि इन दोनों में काफी अंतर होता है। यह दोनों ही आंखों से जुड़ी बीमारियां होती हैं। पर, समस्या के दौरान दिखने वाले लक्षण और कारण काफी अलग-अलग होते हैं। सफेद मोतिया को डॉक्टरी भाषा में कैटरेक्ट कहा जाता है और वहीं डॉक्टरी भाषा में काला मोतिया को ग्लूकोमा कहा जाता है।

दरअसल, आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें, कि काला मोतिया और सफेद मोतिया में, सफेद मोतियाबिंद आंख की लेंस में धुंधलापन आने की स्थिति होती है और वहीं काला मोतिया ऑप्टिक नर्व को नुकसान पहुंचाने के कारण होता है। ऐसे में, अगर समय पर ध्यान न दिया जाये, तो यह दोनों ही अंधापन का कारण बन सकते हैं। सफेद मोतिया से नजर काफी ज्यादा धुंधली हो जाती है, जबकि काला मोतिया आंखों की रौशनी को धीरे-धीरे कम कर अंधेपन का कारण बन सकता है। हालांकि, सफेद मोतिया को सर्जरी के माध्यम से ठीक किया जा सकता है। वहीं काला मोतिया का कोई स्थाई इलाज नहीं है, जिससे कि आंखों की रोशनी को ठीक किया जा सके। केवल आई ड्रॉप्स, लेजर थेरेपी और सर्जरी के माध्यम से इसके आगे होने वाले नुकसान को रोका जा सकता है। इससे यह सिद्ध होता है, कि अगर दोनों बीमारियों की समय पर पहचान न की गई और सही इलाज न दिया गया, तो यह दोनों बीमारियां अंधेपन का कारण बन सकती हैं। इसलिए, सावधान रहना बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। आइये इस लेख के माध्यम से इस के बारे में इस के डॉक्टर से और विस्तार से जानकारी प्राप्त करते हैं।

काला मोतियाबिंद के क्या लक्षण हो सकते हैं?

दरअसल, आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें, कि डॉक्टरी भाषा में काला मोतिया को ग्लूकोमा जाना जाता है। असल में, यह आंखों से जुड़ी एक बेहद गंभीर बीमारी है, जो पीड़ित व्यक्ति को अँधा भी कर सकती है। इसलिए, इस समस्या की समय पर पहचान करना और समय पर इलाज करवाना बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। दरअसल, ग्लूकोमा के कुछ लक्षणों को बिल्कुल भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, नहीं तो इसके कारण आंखों की रोशनी पूरी तरीके से जा सकती है, इसके लक्षण निम्नलिखित अनुसार हो सकते हैं, जैसे कि

  • धीरे-धीरे साइड की नजर काफी ज्यादा कम हो जाना।
  • आंखों में काफी ज्यादा दर्द का अनुभव होना।
  • आंखों में काफी ज्यादा भारीपन महसूस होना।
  • इसके कारण सिर में दर्द होना।
  • ऐसे में आपको रोशनी के चारों और अँधेरा सा दिखाई दे सकता है।
  • अचानक से कम दिखाई देना या फिर नजर धुंधली हो जाना।

आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें, कि ग्लूकोमा जैसी समस्या के ज्यादातर मामलों में पीड़ित व्यक्तियों को इस समस्या का तब पता चलता है, जब आंखों को हद से ज्यादा नुक्सान पहुंच चूका होता है। इसलिए, ऐसे में सतर्क रहना बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण होता है।

सफेद मोतियाबिंद के क्या लक्षण हो सकते हैं?

दरअसल, आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें, कि सफेद मोतिया जो आंखों से जुड़ी एक इस तरह की स्थिति है, जिसमें एक व्यक्ति की आँख का प्राकृतिक लेंस काफी ज्यादा धुंधला दिखाई देने लग जाता है और इसके कारण व्यक्ति काफी ज्यादा परेशान रहने लग जाता है। आम तौर पर, इस तरह की समस्या ज्यादातर 50 से 60 साल के बुजुर्ग लोगों में देखने को मिलती है। सफेद मोतिया की समस्या होने पर पीड़ित व्यक्ति को कुछ लखनो का अनुभव हो सकता है, जिसमें कुछ निम्नलिखित अनुसार हो सकते हैं, जैसे कि

  • पीड़ित व्यक्ति को धुंधला दिखाई देना।
  • रात में किसी भी चीज को देखने में काफी ज्यादा कठिनाई का सामना करना करना।
  • चमकदार रंग भी फीके से दिखाई देना।
  • इस तरह की स्थिति में बार-बार चश्मा बदलने की जरूरत पड़ना।

काला मोतियाबिंद और सफेद मोतियाबिंद के जोखिम कारक क्या होते हैं?

हालाँकि, कुछ लोगों में इस समस्या का खतरा काफी ज्यादा बना रहता है, जिसमें किसी तरह का कोई शक नहीं है। आम तौर पर, काला मोतियाबिंद और सफेद मोतियाबिंद के जोखिम कारक निम्नलिखित अनुसार हो सकते हैं, जैसे कि

काला मोतिया के जोखिम कारक

  • 1. 40 साल से अधिक उम्र होना।
  • 2. डायबिटीज या फिर हाई बीपी की समस्या होना।
  • 3. किसी दुर्घटना के दौरान आंख में कोई चोट लग जाना।
  • 4. काफी लंबे समय से स्टेरॉयड दवाइयां का सेवन करना।
  • 5. आंखों का चश्मा माइनस नंबर का लगा हुआ होना।
  • 6. काला मोतियाबिंद जैसी गंभीर समस्या की फैमिली हिस्ट्री है होना।

काला मोतियाबिंद और सफेद मोतियाबिंद के जोखिम कारक क्या होते हैं?

हालाँकि, कुछ लोगों में इस समस्या का खतरा काफी ज्यादा बना रहता है, जिसमें किसी तरह का कोई शक नहीं है। आम तौर पर, काला मोतियाबिंद और सफेद मोतियाबिंद के जोखिम कारक निम्नलिखित अनुसार हो सकते हैं, जैसे कि

सफेद मोतिया के जोखिम कारक

  • 1. अधिक मोटापा होना।
  • 2. धूम्रपान का अधिक मात्रा में सेवन करना।
  • 3. अधिक उम्र होना।
  • 4. डायबिटीज की बीमारी होना।
  • 5. हाई ब्लड शुगर के कारण आंखों की सेहत प्रभावित होना।
  • 6. ज्यादातर धूप में समय बिताना।
  • 7. आंख में किसी प्रकार की चोट लगना।

निष्कर्ष

आंखों का ध्यान रखना बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण होता है, पर कई लोग इन की देखभाल करना इतना ज्यादा जरूरी नहीं समझते हैं और आंखों से जुड़ी कई तरह की समस्याओं का शिकार हो जाते हैं, जिसमें काला मोतिया और सफेद मोतिया होना काफी आम सा हो गया है। इसलिए आज आंखों से जुड़ी बीमारी होना आज इतना ज्यादा आम हो गया है। काला मोतिया और सफेद मोतिया दोनों ही काफी अलग-अलग होते हैं। इसलिए इन दोनों को एक समझने की गलती न करें और दोनों बीमारियों के अंतर को समझें और समस्या का समय पर इलाज करवाएं। जैसे कि काला मोतिया एक गंभीर बीमारी है, जिसमें व्यक्ति अंधा हो जाता है और वहीं सफेद मोतिया में आंखों का लेंस काफी ज्यादा धुंधला हो जाता है। सफेद मोतिया को सर्जरी के माध्यम से ठीक किया जा सकता है, पर काला मोतिया के कारण होने वाली रोशनी की हानि को ठीक नहीं किया जा सकता है। इसके कारण आगे होने वाली समस्याओं को सर्जरी और आई ड्राप से रोका जा सकता है। इसके बारे में ज्यादा जानकारी प्राप्त करने के लिए और आंखों से जुड़ी किसी भी तरह की समस्या का तुरंत समाधान पाने के लिए आप आज ही सवेरा हॉस्पिटल में जाकर अपनी अपॉइंटमेंट को बुक करवा सकते हैं और इस के विशेषज्ञों से इस के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल!

प्रश्न 1. आंखों को प्रभावित करने वाली चीजें कौन सी हो सकती है?

दरअसल, आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें, कि मुख्य रूप से आँखों को प्रभावित करने वाली कई चीजें हो सकती है, जिसमें धूम्रपान करना, धूप का चश्मा न पहनना, स्क्रीन का अत्यधिक उपयोग करना, रात में आँखों पर मेकअप लगाकर सो जाना और अनियंत्रित मधुमेह शामिल हो सकता है।

प्रश्न 2. काला मोतियाबिंद किस उम्र में अधिक प्रभावित करता है?

दरअसल, काला मोतियाबिंद उन लोगों को अधिक प्रभावित करता है, जिन की उम्र लगभग 40 साल से ज्यादा की होती है।

प्रश्न 3. क्या काला मोतिया और सफेद मोतिया की बीमारी एक साथ हो सकती है?

दरअसल, हाँ व्यक्ति की उम्र बढ़ने की वजह से काला मोतिया और सफेद मोतिया की बीमारी एक साथ हो सकती है। ज्यादातर डॉक्टर इस तरह की स्थिति में, मरीज की स्थिति के हिसाब से ही इलाज करते हैं।

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